अंतर्जनपदीय स्थानांतरण हेतु साइट अपडेट हो गयी है आवेदन अपूर्ण वाले/प्रत्यावेदन अभ्यर्थी आवेदन पत्र संशोधित करें

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आवेदन पत्र संशोधन


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आवेदन पत्र संशोधन 3 october 2020 तक किए जा सकेगें।
  1. आवेदन पत्र अन्तिम रुप से OTP के माध्यम से Submit किया जाएगा ।
  2. संशोधन उपरांत SUBMIT करना न भूलें।
  3. यदि किसी शिक्षक ने ऑनलाइन आवेदन दो चरणों में किया है यानी पहले चरण में रजिस्ट्रेशन व दूसरे चरण में आवेदन हुआ तो दूसरे चरण में की गई प्रविष्टियों के बदलाव होगें। रजिस्ट्रेशन के पत्र में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा।

अंतर्जनपदीय तबादला :

तबादला आवेदन मेडिकल रिपोर्ट अस्वीकार होने पर निरस्त नहीं, जिलों में गठित समिति को शिक्षक दे सकेंगे दावे और आपत्ति, 24 से 28 सितंबर तक होगा निस्तारण

बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों का अंतर जिला तबादला आदेश 15 अक्टूबर को जारी होगा। परिषद ने शिक्षकों को इस बार तमाम सहूलियत दी हैं। सामान्य स्थिति में अब उनका आवेदन निरस्त नहीं होगा।

परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिया है। शिक्षक की जांच में यदि उनकी मेडिकल रिपोर्ट अस्वीकार हो जाती है तो भी उनका आवेदन निरस्त नहीं होगा, बल्कि उसे रिसेट किया जाएगा। बीएसए बैठक की सूचना शिक्षकों को भी देंगे, ताकि उनके उपस्थित होने का मौका मिले। 

अन्तर्जनपदीय तबादलाआवेदन में कर सकेंगे बदलाव


वेबसाइट पर हुए आवेदन में शिक्षक बदलाव भी कर सकते हैं। शिक्षकों के दावे व आपत्तियों के लिए निस्तारण के लिए हर जिले में डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में समिति बनी है। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक व बीएसए सदस्य होंगे। एडी बेसिक मंडल के सभी जिलों के लिए समय सारिणी तय करेगा।


अन्तर्जनपदीय तबादला प्रत्यावेदन

शिक्षकों के प्रत्यावेदन, आपत्ति आदि पंजिका में दर्ज होंगे। यह कार्य जिले के वरिष्ठ बीईओ करेंगे, शिक्षक को प्राप्ति रसीद मिलेगी। समिति से निस्तारण की सूचना परिषद को भेजी जाएगी।
यदि शिक्षक की ओर से दावा किया जाता है कि उसने तबादला आवेदन में गलती से दिव्यांग, गंभीर बीमार, पति पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं आदि का त्रुटिवश विकल्प चुना है तो उस विकल्प को हटाकर ऐसे आवेदन रिसेट किया जाएगा।

इसे फिर से ओटीपी के माध्यम से सबमिट किया जाएगा। यदि बीएसए ने किसी शिक्षक के आवेदन को गलती से असत्यापित या निरस्त कर दिया है ता ऐसे प्रकरणों को समिति के समक्ष प्रस्तुत करके अनुमान लेकर कार्रवाई की जाएगी।

यदि किसी शिक्षक ने ऑनलाइन आवेदन दो चरणों में किया है यानी पहले चरण में रजिस्ट्रेशन व दूसरे चरण में आवेदन हुआ तो दूसरे चरण में की गई प्रविष्टियों के बदलाव पर समिति विचार करेगी। रजिस्ट्रेशन के पत्र में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। समिति के निर्णय की कार्यवाही समय सारिणी के अनुसार वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएगी।

कब खुलेंगे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल:जानिये बेसिक शिक्षा मंत्री की जुबानी

गोरखपुर के दौरे पर आये बेसिक शिक्षा मंत्री ने बेसिक कार्यालय, डायट परिसर और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया। दोपहर 12 बजे गोरखपुर पहुंचे श्री द्विवेदी ने सबसे पहले बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यहां बिना सूचना परियोजना अधिकारी रंजना गुप्ता और लिपिक कामिनी सिंह अनुपस्थित मिलीं। दोनों के अनुपस्थित मिलने पर श्री द्विवेदी ने दोनों का एक-एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया।  

निरीक्षण के बाद डा. सतीश द्विवेदी ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए परिषदीय स्कूलों को खोलने का निर्णय हालात की समीक्षा के बाद होगा। केंद्र की गाइडलाइन का पालन होगा। प्रदेश में उच्च व माध्यमिक विद्यालयों के खुलने के बाद सबसे आखिरी में परिषदीय विद्यालयों को पठ्न-पाठन के लिए खोला जाएगा। 


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डा. सतीश द्विवेदी बुधवार को भाजपा की बैठक में हिस्सा लेने महानगर पहुंचे थे। सर्किट हाउस में मौजूद बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने दोपहर में अचानक विभागीय कार्यालयों का निरीक्षण करने का निर्णय लिया। इसको लेकर अफसरों में हड़कंप मच गया।

आकस्मिक निरीक्षण

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने बीएसए कार्यालय का निरीक्षण किया। बीएसए बीएन सिंह मुकदमे की पैरवी के लिए इलाहाबाद गए हुए थे। यहां जिला समन्वयक विवेक जायसवाल व दीपक पटेल से डा. द्विवेदी ने विभागीय काम-काज की जानकारी ली। उन्होंने हर पटल पर पहुंचकर कर्मचारियों से बात की। उन्होंने मिड डे मील और कायाकल्प समेत विभिन्न योजनाओं के बारे में पूछा।
बीएसए कार्यालय की छत का निरीक्षण करते हुए उसकी जर्जर स्थिति देखते हुए उन्होंने इसकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा।

बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय के सामने जलभराव को लेकर मंत्री ने कहा कि इसका शीघ्र समाधान कराया जाएगा। निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित परियोजनाधिकारी रंजना गुप्ता व लिपिक कामिनी सिंह के अनुपस्थित मिलने पर उन्होंने उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया। 

निजी कालेजों में ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जाए

बेसिक शिक्षा मंत्री ने डॉयट का निरीक्षण करते हुए वरिष्ठ व हालिया नियुक्त प्रवक्ताओं से शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि डॉयट के अलावा निजी कालेजों में भी ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने डॉयट परिसर में कोविड-19 हेल्प डेस्क की सराहना की। मंत्री ने वहां अपना ऑक्सीजन लेवल भी चेक किया। 
कस्तूरबा विद्यालय खोराबार के भवन की मरम्मत कराई जाएगी


बेसिक शिक्षा मंत्री ने नार्मल परिसर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय खोराबार के भवन की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई। निरीक्षण के दौरान छत से पानी टपक रहा था। कमरे में सीलन लगा था। उन्होंने इस संबंध में भवन की मरम्मत के बारे में पूछा। वार्डन नीतू श्रीवास्तव ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए दो वर्ष पूर्व शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने की बात कही। निरीक्षण के दौरान सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक सत्यप्रकाश त्रिपाठी, प्रभारी प्राचार्य डॉयट व जिला विद्यालय निरीक्षक ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह भदौरिया, बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक विवेक जायसवाल व दीपक पटेल व सहायक वित्त लेखाधिकारी एसके श्रीवास्तव मौजूद थे। 


कस्तूरबा के हटाए गए शिक्षक मिले, लगाई न्याय की गुहार


हाल ही में कस्तूरबा से हटाई गईं उर्दू की शिक्षिकाएं और सामान्य विषयों के पुरुष शिक्षकों ने सतीश द्विवेदी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। शिक्षिकाओं का कहना था कि वे बीते सात साल से पढ़ा रही हैं। अब अचानक से उन्हें निकाल दिया गया। ऐसे सूरत में वह कहां जाएं। शिक्षकों की बात सुनकर शिक्षा मंत्री ने लखनऊ जाकर इस सम्बंध में बात कर कोई रास्ता निकालने का आश्वासन दिया। 

UPPSC के दामन पर कब तक लगता रहेगा दाग़?

UPPCS

आर०ओ०-ए०आर०ओ० के सामान्य हिन्दी/व्याकरण के प्रश्नपत्र में अशुद्धियाँ- ही-अशुद्धियाँ!


  • एक अर्से से उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग बदनामी का चादर ओढ़े हुए है। प्रतियोगी विद्यार्थियों का भविष्य नष्ट हो तो हो, ठेंगे से।
  • वे विद्यार्थी आयोग की लापरवाही का शिकार होकर इस न्यायालय से उस न्यायालय तक का चक्कर लगाते-लगाते बूढ़े हो जायें, फिर भी आयोग को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। हम समय-समय पर आयोग के ज़िम्मेदार लोग के कान उमेठते आ रहे हैं; परन्तु लज्जा ऐसी 'बेशर्म', जो कि आती ही नहीं।
  • रविवार को आर०ओ०- ए०आर०ओ० की परीक्षाएँ करायी गयीं। आयोग को यही नहीं मालूम कि वह परीक्षा 'आर०ओ०' का करा रहा है अथवा 'ए०आर०ओ०' का, तभी तो वह दशकों से अपनी परीक्षा का नाम 'आरओ/एआरओ' लिखता आ रहा है, जबकि दोनों पदों के लिए एक ही परीक्षा होती है और प्रश्नपत्र भी एक ही होता है। ऐसे में, उसे इस परीक्षा का नाम 'आर० ओ०- ए० आर० ओ०' रखना चाहिए। कक्षा छ: में ही पढ़ाया गया है कि (/) यह चिह्न 'अथवा' का है और (-) यह चिह्न 'और' का। इस आयोग में एक-से-बढ़कर पढ़े लिखे लोग होंगे; परन्तु अफ़सोस!

    uppsc (RO/ARO) Exam


  • UPPSC को सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र में प्रश्न करने का ढंग तक नहीं मालूम। इतना ही नहीं, इसी प्रश्नपत्र में एक शब्द 'मीमांसा' का अर्थ बताने के लिए एकल उद्धरणचिह्न (' ') का प्रयोग किया गया है तो युगल उद्धरणचिह्न का प्रयोग कर "चारित्रिक" का भी। आयोग को यही ज्ञान नहीं कि कहाँ एकल उद्धरणचिह्न (' ') लगता है और कहाँ युगल उद्धरणचिह्न (" ")। यहाँ एक प्रकार से परीक्षार्थियों को भ्रमित किया गया है।
  • एक प्रश्न में 'आभ्यन्तर' को तत्सम शब्द बताते हुए, उसका तद्भव पूछा गया है और उसका शुद्ध उत्तर 'भीतर' बताया गया है। 'भीतर' शब्द तभी शुद्ध माना जाता जब 'आभ्यन्तर' के स्थान पर 'अभ्यन्तर' होता, जिसकी रचना 'अभि+अन्तर' से हुई है। ऐसे में, आयोग ने हमारे विद्यार्थियों के लिए न्यायालय जाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
  • UPPCS
  •                 जब भी कोई प्रश्न किया जाता है तब उसके प्रश्नात्मक वाक्य होने पर प्रश्नवाचकचिह्न (?) लगाया जाता है और जब प्रश्न सकारात्मक वाक्य में रहता है तब विवरणचिह्न (:--) का प्रयोग होता है, जबकि आयोग ने पूरी तरह से लापरवाही बरतते हुए, 'सामान्य हिन्दी'/ 'व्याकरण' की परीक्षा कराने के नाम पर व्याकरण के साथ क्रूर छल किया है।
  • एक प्रश्न है-- 'विलोम की दृष्टि से इनमें से सही युग्म है' इस 'युग्म है' के आगे कोई विरामचिह्न नहीं लगाया गया है, जबकि यहाँ प्रश्न के अन्त में विवरणचिह्न (:--) लगेगा; क्योंकि नीचे चार विकल्पों के रूप में उनके विवरण दिये गये हैं। ऐसे में, यह प्रश्नात्मक वाक्य ही अशुद्ध है। इस तरह से कुल ६० प्रश्नों में से ४३ प्रश्न ऐसे हैं, जो शुद्ध प्रश्नात्मक वाक्य हैं ही नहीं।

    UPPSC Answer sheet Analysis

  • सीरीज़ ‘बी’ के प्रश्नपत्र में ९ वें में विशेषण-शब्द ‘मानसिक’ का मूल शब्द ‘मानस’ बताया गया है, जो कि अशुद्ध है; शुद्ध मूल शब्द ‘मानस्’ है।
  • ५४ वें और ५५ वें प्रश्न के विकल्प ग़लत दिये गये हैं। ५४ वें में शुद्ध वाक्य पूछा गया है, जबकि चारों विकल्प अशुद्ध हैं। आयोग ने जिस वाक्य को शुद्ध बताया है, उसमें ‘बावजूद’ शब्द अशुद्ध है, शुद्ध शब्द ‘बावुजूद’ है, जो कि फ़ारसी-भाषा का ‘अव्यय’ शब्द है, जो ‘बा+वुजूद’ से बना है। इसी वाक्य में ‘हम लोगों’ का प्रयोग भी अशुद्ध है, शुद्ध शब्द ‘हम लोग’ है। बहुवचन का ‘बहुवचन’ नहीं बनता। क्या ‘आयोगों’ का बहुवचन बनेगा?
  • ५५ वें प्रश्न में अशुद्ध वाक्य-चयन करने के लिए कहा गया है और आयोग-द्वारा जारी उत्तर के अनुसार (डी) को शुद्ध बताया गया है, जबकि इस प्रश्न के अन्तर्गत दिये गये दो विकल्प अशुद्ध हैं। ऐसे में, किसे शुद्ध उत्तर कहा जायेगा? इसका (ए) विकल्प है– पुलिस द्वारा डाकुओं का पीछा किया गया। इस वाक्य में ‘पुलिस द्वारा’ अलग-अलग दिया गया है, जिसका व्याकरण के आधार पर कोई अर्थ नहीं निकलता;
  • क्योंकि ‘पुलिसद्वारा’ अथवा ‘पुलिस-द्वारा’ लिखा जायेगा, तभी इसका अर्थ ‘पुलिस के द्वारा’ होगा, इसीलिए ‘उसके द्वारा’ कहा जाता है, न कि ‘उस द्वारा’। ‘द्वारा’ का प्रयोग करते समय ‘के’ का आश्रय लिया जाता है। इस प्रश्न का विकल्प डी भी अशुद्ध है। उस वाक्य में ‘कोई न कोई’ का प्रयोग किया गया है,
  • जबकि ‘कोई-न-कोई’ होगा; क्योंकि ये शब्दप्रयोग सदैव एक साथ होते हैं, इसलिए योजकचिह्न (-) का प्रयोग उन्हें एक साथ जोड़े रखता है। इसी तरह का एक अन्य प्रयोग देखें– कभी-न-कभी। इस व्याकरणिक आधार पर हमारे विद्यार्थियों का पक्ष सुदृढ़ हो जाता है। प्रश्नों में अन्तिम विकल्प के रूप में ‘इनमें से कोई नहीं’ और ‘उपर्युक्त में से कोई नहीं’– ये प्रयोग पूर्ण वाक्य के रूप में हैं। ऐसे में, इन वाक्यों के अन्त में पूर्ण विरामचिह्न लगेगा, जबकि आयोग ने इसे ज़रूरी नहीं समझा है।
  • इस प्रश्नपत्र के अन्तर्गत प्रश्न निर्धारित करने के लिए उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS)के जिन अधिकारियों ने ‘प्राश्निक’ के रूप में जिनका चयन किया है, उनको कक्षा ६ से ८ तक के भाषा-व्याकरण की पढ़ाई करनी होगी और जिसने प्रश्नपत्र बनाया है, वह बेचारा ‘दया’ का पात्र है।
    उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री को इस दिशा में गम्भीर क़दम उठाने होंगे, अन्यथा उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग के सम्बद्ध अधिकारी भाषाप्रदूषण करते हुए, घृणित कीर्तिमान बनाते रहेंगे।
    (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ सितम्बर, २०२० ईसवी।)

    UPPSC RO/ARO pre answer sheet

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    69000 vacancy latest news

    69000 Shikshak Bharti:

    69000 की जगह 31,661 पदों को भरने के आदेश के खिलाफ SC में दायर याचिका, UP सरकार के फैसले पर रोक लगाने की मांग

    69000 UP Shikshak Bharti:  69000 शिक्षक भर्ती मामले में UP सरकार के 31, 661 पदों को भरने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

    69000 UP Shikshak Bharti:

      69000 शिक्षक भर्तीमामले को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है. दरअसल, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में UP सरकार के 31, 661 पदों को भरने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

    https://twitter.com/ritureniwaladv/status/1308291196582653956?s=19

    • सुप्रीम कोर्टमें BTC छात्रों की वकील रितु रेनुवाल ने याचिका दाखिल की है. याचिका में 31661 पदों की भर्ती के यूपी सरकार के नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की गई है.
    • याचिका में कहा गया है कि 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है. ऐसे में जब तक SC का फैसला नहीं आता है, 31661 पदों की भर्ती के यूपी सरकार के नोटिफिकेशन पर रोक लगाई जाए.
    • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 सितंबर को 31661 पदों को एक हफ्ते में भरने का निर्देश दिया था.


    कोर्ट ने 37,000 पोस्ट शिक्षा मित्रों के लिए रिजर्व रखी थीं, और बाकी पदों पर भर्ती करने को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद यूपी सरकार ने 1 हफ्ते के अंदर शेष पदों पर भर्ती करने का निर्देश दिया था. 

    क्या है विवाद?

     

    • उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षकों की भर्ती का मामला बीते  2 सालों से विवादों में घिरा हुआ है लेकिन अभी तक इन भर्तियों को पूरा नहीं किया जा सका है.
    • पहले यह मामला परीक्षा के कट ऑफ को लेकर कोर्ट में अटका हुआ था, जिसमें छात्रों के एक गुट का कहना था कि सरकार का परीक्षा के बाद कट ऑफ निर्धारित गलत है.

    इसके बाद सरकार ने पिछली बार की तुलना में ज्यादा कट ऑफ निर्धारित कर दी थी.

     इसी बात को लेकर पूरा विवाद शुरू हुआ और मामला इलाहाबाद हाईकोर्टतक पहुंच गया. लंबे समय तक कोर्ट में यह मामला रहा और अंत में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के फैसले को सही मानते हुए भर्ती प्रक्रिया को तीन महीने के अंदर पूरा करने का आदेश भी दे दिया था.

    इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीएम योगी ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को 1 हफ्ते के अंदर निपटाने के आदेश दिए थे.
         लेकिन कट ऑफ मार्क्स को लेकर शिक्षामित्रों ने विरोध किया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी

    और अब एक बार फिर UP सरकार के 31, 661 पदों को भरने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. 

     

    BSA नहीं रोक सकते अध्यापकों का वेतन, हाईकोर्ट ने कहा कानून में नहीं है अधिकार

    BSA Can not stop the salary of the teachers

    जस्टिस एस पी केशरवानी ने संतोष कुमार राय की याचिका पर दिया है। बीएसए(BSA)आजमगढ़ ने कार्य में लापरवाही करने पर याची का वेतन रोक दिया था। याची सहायक अध्यापक है।

    उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं कीगई। कोर्ट ने पूछा कि, किस कानून से वेतन भुगतान रोका गया है।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी किसी भी अध्यापक का वेतन नहीं रोक सकता है। फिर भी ऐसे आदेशों के खिलाफ याचिकाएं दाखिल हो रही हैं।कोर्ट ने सचिव, बेसिक शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा परिषद को आदेश दिया है कि वह देखें कि कानून के विपरीत बीएसए अध्यापकों के वेतन भुगतान अवैध रूप से न रोकें। BSA  RTE act का पालन करायेकोर्ट ने कहा है कि, अनिवार्य शिक्षा कानून की धारा 24 व नियम 19 का कड़ाई से पालन कराया जाए। इस धारा में अध्यापकों और बीएसए के कर्तव्य निर्धारित किया गया है। कोर्ट ने कानून का उल्लंघन करने वाले बीएसए तथा शिक्षकों की जवाबदेही तय करने का भी आदेश दिया है और सचिव को दो हफ्ते में निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है।BSA
    कोर्ट ने कहा कि सचिव बेसिक शिक्षा प्रदेश के सभी बीएसए से हर छः माह में शिक्षकों द्वारा कर्तव्य पालन की रिपोर्ट लेकर अनुपालन कराएं।

    इसके साथ ही बीएसए तथा शिक्षकों के कार्य की मॉनिटरिंग करें और 15 तारीख को अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा मांगा है। यह आदेश जस्टिस एस पी केशरवानी ने संतोष कुमार राय की याचिका पर दिया है।Bsa can't stop salary
    बीएसए आजमगढ़ ने कार्य में लापरवाही करने पर याची का वेतन रोक दिया था। याची सहायक अध्यापक है। उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की गई।
    कोर्ट ने पूछा कि, किस कानून से वेतन भुगतान रोका गया है। कहा गया कि, पेनाल्टी के खिलाफ अपील का वैकल्पिक अधिकार प्राप्त है।

    फिलहाल वेतन रोकने का आदेश वापस ले लिया गया तो कोर्ट ने बच्चों के शिक्षा के अधिकार को कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है।
    उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं कीगई। कोर्ट ने पूछा कि, किस कानून से वेतन भुगतान रोका गया है।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी किसी भी अध्यापक का वेतन नहीं रोक सकता है। फिर भी ऐसे आदेशों के खिलाफ याचिकाएं दाखिल हो रही हैं।कोर्ट ने सचिव, बेसिक शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा परिषद को आदेश दिया है कि वह देखें कि कानून के विपरीत बीएसए अध्यापकों के वेतन भुगतान अवैध रूप से न रोकें। BSA  RTE act का पालन करायेकोर्ट ने कहा है कि, अनिवार्य शिक्षा कानून की धारा 24 व नियम 19 का कड़ाई से पालन कराया जाए। इस धारा में अध्यापकों और बीएसए के कर्तव्य निर्धारित किया गया है। कोर्ट ने कानून का उल्लंघन करने वाले बीएसए तथा शिक्षकों की जवाबदेही तय करने का भी आदेश दिया है और सचिव को दो हफ्ते में निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है।BSA
    कोर्ट ने कहा कि सचिव बेसिक शिक्षा प्रदेश के सभी बीएसए से हर छः माह में शिक्षकों द्वारा कर्तव्य पालन की रिपोर्ट लेकर अनुपालन कराएं।

    इसके साथ ही बीएसए तथा शिक्षकों के कार्य की मॉनिटरिंग करें और 15 तारीख को अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा मांगा है। यह आदेश जस्टिस एस पी केशरवानी ने संतोष कुमार राय की याचिका पर दिया है।Bsa can't stop salary
    बीएसए आजमगढ़ ने कार्य में लापरवाही करने पर याची का वेतन रोक दिया था। याची सहायक अध्यापक है। उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की गई।
    कोर्ट ने पूछा कि, किस कानून से वेतन भुगतान रोका गया है। कहा गया कि, पेनाल्टी के खिलाफ अपील का वैकल्पिक अधिकार प्राप्त है।

    फिलहाल वेतन रोकने का आदेश वापस ले लिया गया तो कोर्ट ने बच्चों के शिक्षा के अधिकार को कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है।

    उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं कीगई। कोर्ट ने पूछा कि, किस कानून से वेतन भुगतान रोका गया है।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी किसी भी अध्यापक का वेतन नहीं रोक सकता है। फिर भी ऐसे आदेशों के खिलाफ याचिकाएं दाखिल हो रही हैं।कोर्ट ने सचिव, बेसिक शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा परिषद को आदेश दिया है कि वह देखें कि कानून के विपरीत बीएसए अध्यापकों के वेतन भुगतान अवैध रूप से न रोकें। BSA  RTE act का पालन करायेकोर्ट ने कहा है कि, अनिवार्य शिक्षा कानून की धारा 24 व नियम 19 का कड़ाई से पालन कराया जाए। इस धारा में अध्यापकों और बीएसए के कर्तव्य निर्धारित किया गया है। कोर्ट ने कानून का उल्लंघन करने वाले बीएसए तथा शिक्षकों की जवाबदेही तय करने का भी आदेश दिया है और सचिव को दो हफ्ते में निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है।BSA
    कोर्ट ने कहा कि सचिव बेसिक शिक्षा प्रदेश के सभी बीएसए से हर छः माह में शिक्षकों द्वारा कर्तव्य पालन की रिपोर्ट लेकर अनुपालन कराएं।

    इसके साथ ही बीएसए तथा शिक्षकों के कार्य की मॉनिटरिंग करें और 15 तारीख को अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा मांगा है। यह आदेश जस्टिस एस पी केशरवानी ने संतोष कुमार राय की याचिका पर दिया है।Bsa can't stop salary
    बीएसए आजमगढ़ ने कार्य में लापरवाही करने पर याची का वेतन रोक दिया था। याची सहायक अध्यापक है। उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की गई।
    कोर्ट ने पूछा कि, किस कानून से वेतन भुगतान रोका गया है। कहा गया कि, पेनाल्टी के खिलाफ अपील का वैकल्पिक अधिकार प्राप्त है।

    फिलहाल वेतन रोकने का आदेश वापस ले लिया गया तो कोर्ट ने बच्चों के शिक्षा के अधिकार को कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है।