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उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से बढ़ा हुआ मानदेय देने का निर्देश दिया है।

विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित जी ने अनुदेशकों के मानदेय में की गई कटौती को उनका उत्पीड़न मानते हुए अनुदेशकों को नौ फीसदी ब्याज का भुगतान करने का निर्देश भी दिया है।

साथ ही अनुराग व अन्य के मामले में लखनऊ बेंच के आदेश को भी इस मामले में लागू करने को कहा है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17000 रुपये कर दिया है।

बाद में न्याय विभाग की आपत्ति पर इसे घटा दिया गया और उन्हें 8440 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया गया। अनुराग के मामले में लखनऊ बेंच ने प्रदेश शासन के मुख्य सचिव व सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक को अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने का निर्देश दिया।

दूसरी तरफ सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय घटाकर 9800 रुपये प्रतिमाह कर दिया। अनुदेशकों का कहना है कि इसके बाद भी उन्हें 9800 की जगह 8470 रुपये मानदेय ही दिया जा रहा है। कोर्ट ने भी इसे उत्पीड़न मानते हुए काटी गई रकम का नौ प्रतिशत ब्याज देने का निर्देश दिया है।


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