Teacher Day:जानिये शिक्षक दिवस का इतिहास,इससे जुड़ी रोचक बातें

Teacher Day (शिक्षक दिवस) 2020

Teacher day (शिक्षक दिवस )के मौके पर देश भर में तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जाए जाते हैं। स्कूल-कॉलेजों में विशेष आयोजन होता है। शिक्षकों (Teacher) को सम्मानित किया जाता है। सरकार की तरफ से भी और शैक्षणिक संस्थाओं की ओर से भी शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले शिक्षकों को पुरस्कार और सम्मान दिया जाता है।

सुशांत सिंह राजपूत

Teacher’s Day 2020: पूर्व राष्ट्रपति का एस राधाकृष्णन का जन्मदिवस शिक्षक दिवस(Teacher`S DAY)के रूप में मनाया जाता है।

सन् 1962 से भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि हमें महान दार्शनिक और शिक्षक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान की याद दिलाता है। डॉ. राधाकृष्णन का मानना था कि “देश के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों को शिक्षक(Teacher) बनना चाहिए”।

क्या आप जानते हैं कि शिक्षक(Teacher) दिवस की शुरूआत कैसे हुई?

एक बार डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन के शुभ अवसर पर उनके छात्रों और दोस्तों ने उनसे उनके जन्मदिन का जश्न मनाने की अनुमति माँगी लेकिन जवाब में डॉ राधाकृष्णन ने कहा कि “मेरे जन्मदिन का जश्न मनाने के बजाय अगर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस(Teacher’s day) के रूप में मनाया जाता है तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी|”

शिक्षकों के बारे में डॉ राधाकृष्णन का मानना था कि समाज और देश की विभिन्न बुराइयों को शिक्षा के द्वारा ही सही तरीके से हल किया जा सकता है।

यह बात सर्वविदित है कि “शिक्षक(Teacher) ही एक सभ्य और प्रगतिशील समाज की नींव रखता है| उनके समर्पित काम और छात्रों को प्रबुद्ध नागरिक बनाने के लिए उनके अथक प्रयास प्रशंसनीय योग्य हैं|”

इसके अलावा, डॉ राधाकृष्णन की इच्छा थी कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए और शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा पद्धति के बीच एक मजबूत संबंध विकसित होना चाहिए| कुल मिलाकर वे पूरी शिक्षा प्रणाली में बदलाव चाहते थे| उनके अनुसार शिक्षकों को विद्यार्थियों का स्नेह और सम्मान प्राप्त करने के लिए आदेश नहीं देना चाहिए बल्कि उन्हें इसके योग्य बनना चाहिए।

इसलिए, शिक्षक(Teacher) हमारे भविष्य के आधारस्तंभ हैं और वे हमें जिम्मेदार नागरिक और अच्छा मनुष्य बनाने के लिए नींव के रूप में काम करते हैं| यह दिन हमारे विकास की दिशा में हमारे शिक्षकों द्वारा की गयी कड़ी मेहनत के प्रति आभार एवं सम्मान प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। 

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन

अपने जीवन में आदर्श शिक्षक(Teacher) रहे भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था. इनके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी राजस्व विभाग में काम करते थे. इनकी मां का नाम सीतम्मा था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा लूनर्थ मिशनरी स्कूल, तिरुपति और वेल्लूर में हुई. इसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की. 1903 में युवती सिवाकामू के साथ उनका विवाह हुआ.

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– राधाकृष्णन ने 12 साल की उम्र में ही बाइबिल और स्वामी विवेकानंद के दर्शन का अध्ययन कर लिया था. उन्होंने दर्शन शास्त्र से एम.ए. किया और 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक अध्यापक के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई. उन्होंने 40 वर्षो तक शिक्षक के रूप में काम किया.

– वह 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे. इसके बाद 1936 से 1952 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहे और 1939 से 1948 तक वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर आसीन रहे. उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया.

– साल 1952 में उन्हें भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति बनाया गया और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनने से पहले 1953 से 1962 तक वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति थे. इसी बीच 1954 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें ‘भारत रत्न’ की उपाधि से सम्मानित किया. डॉ. राधाकृष्णन को ब्रिटिश शासनकाल में ‘सर’ की उपाधि भी दी गई थी.

इसके अलावा 1961 में इन्हें जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा ‘विश्व शांति पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था. कहा जाता है कि वे कई बार नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट हुए थे.

– डॉ. राधाकृष्णन ने 1962 में भारत के सर्वोच्च, राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया. जानेमाने दार्शनिक बर्टेड रशेल ने उनके राष्ट्रपति बनने पर कहा था, ‘भारतीय गणराज्य ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति चुना, यह विश्व के दर्शनशास्त्र का सम्मान है. मैं उनके राष्ट्रपति बनने से बहुत खुश हूं.

प्लेटो ने कहा था कि दार्शनिक को राजा और राजा को दार्शनिक होना चाहिए. डॉ. राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाकर भारतीय गणराज्य ने प्लेटो को सच्ची श्रद्धांजलि दी है.’

– डॉ. राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल, 1975 को हो गया, लेकिन एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में वह आज भी सभी के लिए प्रेरणादायक हैं.

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अन्य देशों में कब मनाया जाता है शिक्षक (teachers day)दिवस?

दुनिया के तमाम देशों में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। तो वहीं यूएस में मई के पहले सप्ताह के मंगलवार को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इसी तरह थाईलैंड में हर वर्ष 16 जनवरी को, ईरान में 2 मई को, टर्की में 24 नवंबर को, मलेशिया में 16 मई को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इसी तरह रूस में वर्ष 1965 से 1994 तक अक्टूबर के पहले रविवार को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता था। वर्ष 1994 में यूनेस्को द्वारा विश्व शिक्षक दिवस घोषित होने के बाद 5 अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा। वहीं, चीन में 10 सितंबर को टीचर डे मनाया जाता है।

 

Teacher’s Day 2020: भारत में हर साल 5 सितंबर को देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्मदिवस के अवसर पर शिक्षक दिवस (Teacher day)मनाया जाता है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई अहम योगदान दिये थे और अपने जीवन के 40 वर्ष तक अध्यापन का कार्य किया। वे एक राजनीतिज्ञ, विद्वान, और दार्शनिक थे। उन्हे जीवन में कई सम्मान से नवाजा गया। जब 1917 में उनकी पहली किताब “The Philosophy of Rabindranath Tagore” आई तब विश्व को भारत के दर्शनशास्त्र की महत्ता पता चली। वे 1931-36 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। 1936-52 के बीच ऑक्सफोर्ड विश्विद्यालय में अध्यापन किया। डॉ. राधाकृष्णन कुछ समय के लिए बनारस हिंदू विश्विद्यालय के कुलपति भी रहे। उन्हें साल 1936 में नाईटहुड के सम्मान से और 1952 में भारत रत्न से नवाजा गया था।

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