UP PCS परिणाम और हिन्दी पट्टी के होनहार

Share for friends

अंग्रेजो के जमाने में बने संघ लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में आधुनिकता के इस दौर में छात्रों के हित के लिए परिवर्तन आवश्यक हो गया है।

बिहार,मध्यप्रदेश, हरियाणा राजस्थान जैसे प्रदेशों के लोक सेवा आयोग में अन्य प्रदेश के छात्रों के चयन का कोटा 5%या 10% से ज्यादा नही होता है किंतु उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में इस तरह का कोई प्रावधान नही है, इससे प्रदेश की प्रतिभा दब जाती है या अन्य सभी राज्य भी इस प्रतिबंध को समाप्त करें।

पूर्व चयनित अभ्यर्थियों का चयन

UP PCS के अंतिम चयन के बाद किसी भी प्रतीक्षा सूची का प्रावधान न होने से काफी प्रतिभा चयन के मुहाने से बाहर हो जाती है क्योंकि चयनित छात्र पूर्व से किसी न किसी सेवा में जरूर होते है(अधिकांशतः)


या तो वो अच्छे विभाग के चक्कर वहां से छोड़कर इस चयन सूची में आ जाते है या पिछली सेवा से रैंक इस बार खराब होने पर वो उसी सेवा में बने रहना चाहते है जिससे सैकड़ो पदो पर योग्य अभ्यर्थियों के होते हुए भी पद खाली चले जाते है (UPSC ,UPPSC दोनो जगह इसकी पहल होनी चाहिए

लेटलतीफी

आयोग के अड़ियल रवैये और वार्षिक परीक्षा ससमय न पूर्ण कराने की वजह से कुछ बच्चे एक साथ कई परीक्षाओ में चयनित हो जाते है जैसे कुछ छात्र विगत 8 माह में IAS,IES, PCS 2017,2018, RO 2017 तीन या अधिक या किसी 2 मे एक साथ चयनित हुए है किंतु वो अपनी सुविधानुसार किसी एक मे चयन लेंगे !

इस स्थिति में सभी परीक्षाओ में चयन सूची होने पर कुछ योग्य प्रतिभा को भी चयनित होने का और मौका मिलने की उम्मीद रहती है (यह दिक्कत केवल UPPSC में है पंचवर्षीय परियोजना की भांति क्रियान्वयन है इनका)

माध्यम का फर्क

इस बार के अंतिम चयन में अंग्रेजी भाषा से चयन 70% और विज्ञान वर्ग के लोगो के लोगो का फायदा हुआ है उत्तर प्रदेश हिंदी भाषी है किंतु हिंदी माध्यम के छात्रों को बस कोचिंग तक सीमित रखा गया है।

IAS से जो इसी भाषा की वजह से बाहर हुए थे वहां 10%भी चयन नही हुआ था वही हाल UPPSC 2018 के परिणाम में हुआ जो छात्र SDM, Dy.SP,ACTT की दौड़ में थे वो प्रिंसिपल,DPRO,DSO एक्ससाइज इंस्पेक्टर तक सीमित रह गए है इसका जिम्मेदार हमारी मातृभाषा हिंदी माध्यम का होना है और आगामी 14 सितंबर को हिंदी दिवस और हिंदी सप्ताह मनाकर बस कागजो में पुनः बन्द कर देंगे आगे कोई और परिणाम आएगा तब फिर चिल्लायेंगे
( (UPSC ,UPPSC दोनो जगह इसकी पहल होनी चाहिए)

लालफीताशाही

RO/ARO में नकारात्मक अंकन का प्रावधान विज्ञापन के विरुद्ध किया गया है ये आयोग के माननीय अध्यक्ष जी के अपने ही नित नए नवाचारों में एक कड़ी है ।। इन्ही महोदय के नवाचार के चक्कर मे विज्ञापन और परीक्षा होने के बाद कट ऑफ लगाकर आज तक 69000 विगत 2 वर्षों से कोर्ट के चक्कर लगाकर भर्ती भी सो गई है छात्र तो मानसिक,आर्थिक शारीरिक रूप से थक चुके है

समस्या यह भी है कि संघ लोक सेवा आयोग- जिसका अर्थ भावी अधिकारियों की भर्ती करना है- सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा संचालित किया जाना. ‘आप ऐसी प्रणाली की अभिजात संरचना को कैसे बदल सकते हैं

जिसके प्रवेश द्वार अंदर के लोगों की निगरानी में रहते हैं? संघ लोक सेवा आयोग में शायद ही कभी शिक्षाविद रहे हों जो शीर्ष पर हों. वे अपने ही तरह के लोगों की तलाश में रहते हैं.’

यह उन लोगों की गहरी जटिलताओं से भरा है जो अंग्रेजी नहीं जानते और क्षेत्रीय भाषाओं में अध्ययन करते हैं.

भारत में नौकरशाही ‘अंग्रेजी में सोचती है’. ‘तो हम शिकायत करते हैं कि नौकरशाही और आम आदमी के बीच जुड़ाव नहीं है लेकिन पिछले छह वर्षों के दौरान, चीजों में बदलाव आने लगा है.’!

सामाजिक न्याय को भूलता आयोग

मुख्य परीक्षा में 18 गुना के स्थान पर 13 गुना अभ्यर्थियों को बुलाना साक्षात्कार में 3 गुना के स्थान पर 2 गुना ही अभ्यर्थियों को बुलाना ये सब इनकी ही नवाचारी सोच की उपज है जिससे योग्य अभ्यर्थियों की प्रतिभा को दफन करने में इनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है

इन सब परिस्थितियों के लिए छात्रों के गूंगे बहरे बने रहने के कारण संवैधानिक निकाय निरंकुश होती जा रही है और आज की डेट में दबाव समूह दलाल समूह बन चुका है।

शासन सत्ता और न्यायपालिका का क्या कहना अगर इनको और इनके खिलाफ कुछ बोल दो तो जेल और अगर नौकरी कर रहे है तो विभाग की नियमावली का हवाला देकर बर्खास्त!

सब #नाटी है बस यही कहना है

🙊🙊🙊इन सबके सुधार के लिए एक काम हो सकता है कि नेताओ की योग्यता तय हो।

किसी भी भर्ती के विज्ञापन से लेकर चयन तक कि वार्षिक समय सीमा तय हो यदि वह इसमें असफल साबित हो तो उस भर्ती से संबंधित सभी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

लेखक – संजीव त्रिपाठी एवं टीम

UP PCS परिणाम और हिन्दी पट्टी के होनहार

One thought on “UP PCS परिणाम और हिन्दी पट्टी के होनहार

thanks

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to top