व्हीट मैन ऑफ इन्डिया

wheat man of india
wheat man of india

व्हीट मैन ऑफ इंडिया डा० ज्ञानेन्द्र सिंह।

देश में नये गेहूं क्रांति की इबारत रच रहे हैं डा० सिंंह

इनके अनवरत अनुसंधान का नतीजा है,पूरे देश में गेहूं की पैदावार का 60% प्रतिशत हिस्सा इन्हीं के द्वारा विकसित की गई प्रजातियों से होता है।

         इनके द्वारा अब तक 188 शोध पत्र  प्रकाशित किए जा चुके है।

U सबसे क्रांतिकारी खोज एचडी-2967, 3086 है। इनके द्वारा विकसित की प्रजातियों से प्रति हेक्टेयर 58 विंंक्टल तक पैदावार होता है।

इनमें डीबीडब्ल्यू-187 सबसे नई प्रजाति है, जिसे ‘करण वंदना’ भी कहते हैं। हरियाणा सहित पूरे उत्तर-पूर्वी भारत के गंगा तटीय क्षेत्र के किसान इसका जमकर प्रयोग कर रहे हैं।

डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह कहते हैं, गेहूं ब्लास्ट रोग से लड़ने में बेहद कारगर यह किस्म इन क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों व जलवायु में खेती के लिए पूर्ण उपयुक्त है। अन्य किस्में जहां बमुश्किल 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती हैं, वहीं इससे 68 क्विंटल तक पैदावार ली जा सकती है।

बुआई के बाद फसल की बालियां 77 दिन में निकल आती हैं और कुल 120 दिन में फसल तैयार हो जाती है। डॉ. सिंह गेहूं के दिशा-निर्देशन में ही विकसित अन्य प्रजातियां भी खूब प्रचलित हैं।

                    इनमें डीबीडब्ल्यू-222 प्रति हेक्टेयर 64 क्विटंल और डीबीडब्ल्यू-173 प्रति हेक्टेयर 58 क्विंटल पैदावार देती है। वे बताते हैं कि बेहतर पैदावार के बूते इस वर्ष गेहूं उत्पादन का 102 मिलियन टन का लक्ष्य प्राप्त करने की तैयारी है। 2030 से 2050 तक 140 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन लक्ष्य हासिल करना है।

       

डॉ. सिंह सफलता का एक और अध्याय रचने जा रहे हैं। वे इस साल की आखिरी तिमाही तक डीबीडब्ल्यू-303 नामक नई प्रजाति लेकर आएंगे, जिसकी पैदावार क्षमता पिछली प्रजातियों से अधिक होगी। करण नरेंद्र नामक डीबीडब्ल्यू-222 प्रजाति पहले ही नए आयाम स्थापित कर रही है। उन्होंने बताया कि इस साल गेहूं उत्पादन में भी नया रिकॉर्ड बनेगा।

                  .्उ्पलब्धियों की लंबी फेहरिस्त : डॉ. सिंह मूलत: वाराणसी से हैं। उन्होंने कृषि विज्ञान की शिक्षा कृषि विज्ञान संस्थान और काशी हिंदू विवि से ली। 1996 से 2001 तक करनाल में वैज्ञानिक के पद पर रहे।

उन्हें अनुसंधान में उत्कृष्ट सेवा के लिए डॉ. बीपी पाल अवार्ड, रफी अहमद किदवई, डॉ. वीएस माथुर अवार्ड, बीजीआरआई जीन स्टूवर्डशिप अवार्ड, नानाजी देशमुख आउटस्टैंडिंग अवार्ड, डॉ. अमरीक सिंह चीमा अवार्ड से नवाजा जा चुका है।

वह नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, इंडियन सोसायटी ऑफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग व सोसायटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ व्हीट एंड बार्ले रिसर्च के फैलो हैं। सोसायटी ऑफ एडवांसमेंट ऑफ व्हीट रिसर्च के वह अध्यक्ष हैं और पौध प्रजनन पर उनके 188 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

 

thanks

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.